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जब एक आम सी सुबह ख़ास हो गयी (बैटमैन और इंडियनमैन की मुलाकात)

वैधानिक चेतावनी: इस लेख में हम, हमारा, हमें सब एकवचन (Singular) हैं कृपया इन लफ़्ज़ों से धोखा ना खाएँ| लखनऊ वासियों का इस चेतावनी से कोई लेना देना नहीं है वो समझदार हैं|

नोट: आम तौर पर लोग नोट अंत में लिखते हैं, पर हम थोड़ा विशेष किस्म के प्राणी हैं इसलिए …. आगे आप खुद समझदार हैं| हमने जन्म तो श्री राजीव गाँधी के समय में लिया था पर राजनीति से लगाव श्री अटल बिहारी वाजपयी के समय में हुआ अटल जी और प्रमोद महाजन जी को लोक सभा में दहाड़ते हुए देखना बहुत ही अच्छा लगता था| हमेशा से यही इच्छा थी क इस देश की बागडोर ऐसे इंसान के हाथ में हो जिसकी गर्जना पूरे विश्व में सुनाई दे| लेकिन तभी मनमोहन सिंह हुए और बाकी सब तो इतिहास है|

इस लेख की शुरुआत हम पा फिल्म के Delhi Metro वाले द्र्श्य से करना चाहते हैं, जहाँ MP (अभिषेक बच्चन) बच्चे औरो (अमिताभ बच्चन) को बिना बॉडीगार्ड्स के मेट्रो में घूमने को बेफ़्कूफी बताता है और कहता है ‘डर की बात नही है औरो ये बेफ़्कूफी है, पागल लोग हैं गोली मार देंगे, I am on hit list’ . खैर तब हमें यही लगता था की MP/MLA होना आपको उसी जनता से दूर कर देता है जिसने आपको उस पद पर पहुँचाया है| और कहीं ग़लती से अगर आप UP के रहने वाले हैं तो इस बात को और भी भली भाँति समझ सकते हैं जहाँ राजनीति और राजनेता दोनो ही elite हैं, जिनका सामान्य नागरिकों से ताल्लुक सिर्फ़ एक मिथ्या(lie) है |यहाँ जब मुख्य मंत्री या किसी केबिनेट मंत्री का काफिला निकलता है तो सड़क किनारे खड़े लोग घंटों अपने चेहरे की धूल सॉफ करते रह जाते हैं, ऐसे में उनकी झलक पाने की तो सिर्फ़ कल्पना मात्र ही की जा सकती है| अब तक आपको यह अंदाज़ा तो लग ही गया होगा के हम उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखते हैं, लेकिन हाल ही में हमारे साथ कुछ ऐसा घटित हुआ जिसने  राजनेताओ के प्रति हमारी धारणा को ही बदल दिया|

ज़्यादा उतावले होने से काम नही चलेगा, पूरा पढ़ना पड़ेगा😉

अब एक दिन ये उत्तर प्रदेश निवासी अपने किसी निजी काम से दिल्ली आती है | एक आम सी सुबह को तैयार होकर Delhi Metro पे सवार होती है| अभी महिला कोच में सीट ले ही पाई थी के मेट्रो का ड्राइवर दूसरी ओर से आता है, एक आंटी जी के पूछने पे उन्हे धीरे से बताता है कि इसी मेट्रो में मोदी जी भी यात्रा कर रहे हैं| मोदी जी का नाम सुनते ही उसने अपने दोनो कान उनकी वार्ता पे लगा दिए| वार्ता सुनते ही तुरंत फोन निकाला और अपने भाई (जो की मोदी जी का बहुत ही बड़ा वाला भक्त है) को मैसेज किया ”Modi ji और हम एक ही मेट्रो में Travel कर रहे हैं |’ भाई का तुरंत कॉल आया ‘फोटो ज़रूर लेना’ और फोन काट गया| हमने अपने फोन की मेमोरी चेक की जो पूरी फुल थी, उससे कुछ फोटो और गाने डेलीट किए| ऐसा करना भी तो ज़रूरी था भाई, वर्ना कहीं हमें फोटो खिचने का मौका मिलता और हमारा फोन ही साथ ना देता, तब तो नाइंसाफी हो जाती| हमारा स्टेशन आने ही वाला था की हमने मोदी जी के coach की तरफ कूच कर दिया| 2nd Last डिब्बे को देखते ही समझ आ गया था के मोदी जी लास्ट डिब्बे में ही हैं| 2nd Last डिब्बा जो नीली सफ़ारी सूट वालों (SPG Personnels) से भरा हुआ था और गेट पे लोगों का ताँता जो लगा हुआ था| हम अभी भीड़ में घुसने के बारे में सोच ही रहे थे के तभी एक आवाज़ आई “आप आ जाओ”, एक नीली सफ़ारी वाले बोले| आहा! हमारी तो खुशी का ठिकाना ही ना रहा, अभी तक हम एक Professional Photographer की तरह यही सोच रहे थे कि किस Angle से फोटो लेंगें, खैर सोचते हुए गेट तक पहुचे कि एक और सफ़ारी वाले ने हमें रोक लिया बोले Bag नही ले जा सकते| हमने कहा कि हम इसे बाहर रख देते हैं, पर वो अड़ गये “नहीं इसकी ज़िम्मेदारी कौन लेगा”|

हमारा उत्साह देखते हुए एक अंकल वालंटियर करते हुए बोले, ‘लाओ बेटा Bag हमें दे दो’ और हमने अपना Bag खुशी-खुशी उन्हे दे दिया| एक औपचारिक चेकिंग के बाद हम लास्ट कोच के अंदर प्रवेश कर गये | हमारे कदम तो तेज़ी पकड़ रहे थे, तभी एक सफ़ारी वाले आगे आए और बोले ‘रुकिये Family को हट जाने दीजिए पहले’| हम साइड वाली सीट पे मुस्तैद अपने फोन का Camera चेक कर रहे थे मानो जंग में खड़ा सिपाही अपनी गोलियाँ गिन रहा हो खैर अगले 1 minute में हमारा नंबर आ गया, फोन को बाएँ हाथ में पकड़ते हुए, हमने अपना दाहिना हाथ Modi ji की ओर बढ़ाया, उन्होने ने भी गरम जोशी से हाथ मिलाया| अब तक हम मोदी जी के बराबर में स्थान ग्रहण कर चुके थे और प्लानिंग के मुताबिक हमने फोन निकाल लिया था, तभी मोदी जी बोले “कहाँ जा रहे हो?”

हमने उत्तर दिया “सर कालका जी”

मोदी जी आगे कुछ बोल पाते इससे पहले ही हमने पूछा “सर एक सेल्फिे ले लें”. मोदी जी ने सर हिलाते हुए Permission दे दी और बोले “ इसमे सामने वाला कैमरा नही है क्या?

हम :”सर Black Berry का पुराना मॉडल है फ्रंट कैमरा नही आता था तब ”

मोदी जी ने फिर पूछा: “क्या कर रहे हो?”,

हम: “सर IAS  के लिए Prepare कर रहे”|

मोदी जी :“अच्छा, कहाँ से तैयारी कर रही हो?”

हम: “सर, Rajendra Nagar”

मोदी जी:” कहाँ से आए हो?”

हम: “सर कानपुर”

इतना बोलने के बाद मुँह से बार बार यही निकल रहा था Sir, it’s a pleasure to see you here . I have never seen any leader between the crowd”. हमारी हालत उस बच्चे की तरह थी जिसे जिसे बचपन से इंग्लिश बोलने के लिए Trained किया जाता था “ बेटा अंकल आए हैं हैलो बोलो, अंकल से इंग्लिश में बात करो.” चाहकर भी हिन्दी नहीं निकल रही थी (वैसे हम बहुत अच्छे नही हैं इंग्लिश बोलने में, पर फिर भी) खैर समय सीमा को देखते हुए हमने मोदी जी से विदा लेते हुए एक बार फिर हाथ मिलाया और कहा “Sir, it is truly an honor to meet you.”

हमारे लिए ये Moment काफ़ी अचंभित करने वाला था, अब आप ये सोच रहे होंगे कि इसमे ऐसे अचंभे वाली ऐसी क्या बात थी मोदी जी तो उस दिन inauguration में जा रहे थे बहुत लोगों से मिले उनसे बात की, हाथ मिलाया ) हमारे लिए इसमे क्या अलग था, उसका Background बताना चाहेंगे|

हुआ यूँ कि एक दिन पहले टीचर्स डे था, और प्रणव सर ने किसी स्कूल में क्लास ली थी, मोदी सर ने भी Video Conferencing  के ज़रिए क्लास ली और हमारे पास तब इंटरनेट की सुविधा ना थी| हम यही सोच रहे थे कि कितने लकी होंगे वो बच्चे जो इनसे रूबरू हुए होंगे, सामने से बात करेंगे, सवाल पूछते होंगे| हमें उन बच्चों से थोड़ी जलन हो रही थी, हमें बिल्कुल भी अंदाज़ा नही था कि भगवान हमारी अर्ज़ी को Direct संज्ञान में ले कर कार्यवाही कर देंगे और अगले ही दिन हमें मोदी जी से रूबरू होने का मौका देंगे| कई लोगों ने मोदी जी के Metro में चलने पे भी सवाल उठाए के “ये तो पब्लिसिटी स्टंट है”, तो मेरे प्यारे मित्रों अपनी जान पे खेलकर स्टंट करना वाकई में मज़ेदार होता होगा, तभी शायद मोदी जी ने ये कदम उठाया होगा (मोदी जी तो Terrorist Organisations की हिट लिस्ट में सबसे ऊपर हैं ) Criticism विकास के लिए आवश्यक है, ऐसा हम भी मानते हैं, परंतु यहाँ पर Constructive Criticism की आवश्यकता है| मोदी जी इस देश के प्रधानमंत्री हैं वो निर्णय लेने का अधिकार रखते हैं, और भारत के नागरिक होने के नाते हमें उन निर्णयों की इज़्ज़त करनी चाहिए|

Anyway, Now after effects of this meeting:

Selfie ली हुई फोटो हमने अपने भाई को भेजी  तो उसका Message Saif Style में  “Whaaooo Man!” आया| आगे Message पढ़ पाते कि हमारी माता जी का कॉल आ गया, किसी CBI अफ़सर की तरह उन्होने पूछताछ शुरू कर दी  “कहाँ हो तुम अभी”, हम समझ गये कि भाई के पेट में पचा नहीं और उसने मम्मी को बता दिया, हम अभी सोच विचार में ही थे कि मम्मी ने दोबारा चिल्लाया, “सुनाई नही दे रहा तुम्हे कहाँ हो?” हमने थोड़ा सम्हलते हुए Answer किया मेट्रो स्टेशन पे हैं| क्या हुआ? मम्मी फिर चिल्लाई “ये काली T-Shirt तुमने कब ली” अब हम थोड़ा  Confuse हो गये (हमें T-Shirts खरीदने की बीमारी है, अच्छी T-Shirt देखते ही लेने का मन कर जाता है  और सभी माओं की तरह हमारी माँ भी परेशान रहती हैं हमारी इस आदत से )| हमने पूछा “आपने फोटो देखा क्या?” मम्मी बोली ”यहाँ सब लोग देख रहे हैं , उतनी देर से टीवी पे दिखा रहे हैं, मामा का फोन आया था, “टीवी खोलो, AAJ TAK लगाओ, शानू PM क साथ बैठी है”| हमें इतना गुस्सा आया, हमने चिल्लाते हुए कहा “मम्मी, सब लोग हमें देख रहे हैं और आप एक T-shirt के पीछे पड़ी हो” खैर इसके बाद भी हमें लंबा चौड़ा Explanation देना पड़ा (वाह री मेरी UP की माँ)|

3 दिन से बिट्टू (हमारी बहनजी Geetanjali  Singh) हमारे साथ दिल्ली की धुप, धुल खा रही थी, हमें Settle करने के लिए और जब 6 को भी हमने उसे साथ चलने को कहा तो बोली “बस अब हम नहीं जा सकते”| हम उसे बिना लिए निकल गए और जब शाम को वापस आये तो वो एक बार फिर रो रही थी.. जी हाँ ये  वही लड़की है जो दिल्ली में बीजेपी के हारने पे बाल्टी भर रोई  थी (वास्तव में), और आज  फिर से इसके साथ नाइंसाफी हो गयी| हमने होस्टेल वापस आते ही सबसे पहले अपने सीनियर Abhishek Vashisth सर जिन्हे लोग Jr. Modi क नाम से जानते हैं, पूरा किस्सा बताया| वो तो भाव विभोर ही हो गये बोले ”तू मिल ली मोदी जी से, बस समझ ले कि मैं मिल लिया ”| कभी कभी लोग ज़्यादा ही Senti Dialogue मार देते हैं|

6 Sept का दिन तो ठीक बीता, पर फिर अगली सुबह से फोन आने लगे “आप ने तो फ्रंट पेज ले लिया, क्या बात है ”. हम नीचे गये पेपर लेने, पेपर (The hindu) में देखा कोई फोटो नही थी| हमने सोचा होगा किसी और पेपर में| पर थोड़ी ही देर में लोगों ने कई अख़बारों के Pics भेजने शुरू कर दिए, लोगों ने तो उसपे Troll भी बना दिया, पर उस एक Moment ने तो हमे Celebrity of the day ही बना दिया🙂

इतनी खुशी तो लोगों को शायद हमारे पैदा होने की भी ना हुई थी, जितना मोदी जी से मिलने की हुई (B’day पे इतने कॉल और मेसेज नही आए जितने आज आए )

“अरे तुम ही हो ना वो Batman वाली” Compliment सा लगने लगा है|

PS: Thank you AAJ TAK for featuring me again and again, to make my cute little neices kukku, aadi n betu smile, even when I was not there🙂.  Thank you Prime Minister Narendra Modi ji for giving me your valuable time and making me a celebrity (atleast for a day). Thank you BJP for featuring me on your FB page (जिन लोगों ने कहीं नही देखा उन्होने यहाँ से देख लिया ;))Thank you Dainik Jagran कानपुर के घर-घर में पहुचाने के लिए|

PPS: जो लोग कुछ मिस कर गये अब उन्हें हम ज़बरदस्ती पढ़वा रहें हैं| यह एक साज़िश है खुद को Famous करने के लिए|

मेरे फोन की click
मेरे फोन की click
The troll
The troll

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My brother has sent this screen shot :)
My brother has sent this screen shot🙂
Some news paper
Some news paper

……………………………………………….

कभी कभी अपनी ही दुनिया से डर लगता है
ख़ामोशी और सन्नाटे क बीच अपने जज़्बातों को तैरते हुए देखना,
इतना खौफनाक क्यूँ लगता है!
कभी कभी लगता है के खोल दूं दरवाज़े,
आने दूं उस क़िरण को जो ये अंधियारा मिटा सकती है
आने दूं उस सरसराती हवा को जो इस सन्नाटे को चीर सकती है
आने दूं उन हँसी के ठहाकों को जो इस पल की ख़ामोशी डोर कर सकते हैं
पर अगले ही पल डर लगता है
यह मैं कहाँ बहे जा रही हूँ,
सच्चाई का बोध सा होने लगता है
ये किरण रोशनी देने नहीं जलाने आई है
ये सरसराती हवा जड़ से उखाड़ने आई है
ये  हँसी के ठहाके खुशियाँ बाटने के नहीं किसी पे तंच कसने के हैं
नहीं नहीं

इससे तो मैं अपनी ही दुनिया में ठीक हूँ
यह मुझे मेरे अस्तित्व का बोध कराती है
नहीं जाना मुझे उस कोलाहल में चन्द लम्हों के सुख के लिए
और यूँ मैने अपना आँचल हमेशा के लिए समेट लिया!

Adhoori Rakhi

Aaj rakhi ka tyohaar hai
Behan ne thaali sajai, raakhi mithai bhi lagayi
Intezar mein thi uske jisne
sabse pehle raakhi bandhwai har saal
Jab behen dilli chali gayi wo
jaata tha dilli rakhi bandhwaane
jhagda hota tha dono mein gifts ko lekar
Wo kabhi use manpasand tohfa nahi de paaya.
Par aaj kyun use kisi tohfe ki chah nahi hai
Kyun uski aankhen darwaze par lagi hain
Kyun ye chaahat hai k wo aa jaaye
wo kaise aayega jo is duniya mein hi nahi hai
Uske bagair ye pehli rakhi hai
uska iklauta bhai uske paas hi nahi hai
Par uska man ye nahi maan raha
Reh reh k aisa lag raha hai jaise wo aa jayega
Wo nahi aaya.. Bas uski yaad aayi!!
Aur bahut saare aansu laayi.
Aaj kuch nahi chaiye use
koi tohfa nahi
Bas wo aa jaaye aur bole
Kyun rakhi nahi baandhegi kya aaj!! Rakhi

Yatra Naryastu Pujyante, Ramante Tatra Devata (Women Are Honored Where, Divinity Blossoms There)

Copied from one of my friend’s article, and sadly its true!! If you really want to help a girl, please help her this way. This will be far better than any debates, punishment, media gatherings and protests.

We’re the culprits – Protest against yourself

Rape by definition is a crime of forcing a woman to submit to sexual intercourse against her will. Since last few days, I am seeing everybody getting extremely angry about situation in the country after a teenager was brutally raped in the capital city. Everyone around me, my parents, my friends, my colleagues, and almost the entire city and the country is asking for the strictest of punishment for this act. But, is that the solution? If the _problem_ lies just in this one-shot activity, where the person forced the girl against her will, then punishing the culprit might be the solution.

However, rape is not a one shot activity. We prepare our children for rape throughout their life. We, at our home, schools, work-places & in the society _prepare_ our daughters, throughout their formative years, to undergo a mental, psychological and eventually physical rape. Similarly, we prepare our sons as well, throughout their formative years, to get indulge in this act of physical and psychological rape of the other gender.

From the childhood days, we train our boys that you are strong; don’t behave like girls. From the childhood days we train our girls that they love playing with dolls, soft things. Power toys, we say, are meant for boys only. Every action of ours at our home, directly or indirectly, tells a boy that he is different from his sister, and is stronger than her and has to protect her; the sister is weak. Think about things happening in your home – EVERY SINGLE ACT is like this. Every such action of ours gives message to our daughters that they are weak. Only a boy can play football or cricket. Only a boy is allowed to go and openly drive a bike or scooter. By the time the boys and girls are over 10 years, their minds are already tuned to this that males are stronger in the society, females are weak.

How many of our parents (all of whom are there to protest at India Gate) are willing to end all sort of disparities between girls and boys. After marriage, girl has to move to boy’s house, can we change that? No – we think of fuc***g society first. We think what society will think – in everything we do. And, later we say my girl/our girls are getting raped.

Today, I ask my parents and relatives and their friends – isn’t the problem of gender differences and inequality starts at our home and continue for lifetime? The solution lies at changing the mindset of ours, our sons and our daughters so that girls feel stronger in the society and boys feel equal to girls and not stronger. Think of it – Every day, we train the brains of our children so that when they are grown up they indulge in these act of rape (physical or mental) – A rape that a girl has to undergo every passing day in this society.

Jahan badal gaya

Purani kitabe jhaadi, kuch fate panne aur tasvireen gir gayi
Kuch baat thi unme khaas k aankhen nam ho gayin.
Dost ne poocha aisa kya hai inme jo achanak aankhen bhar aayin.
Ab kaise samjhayen inhe k ye panne nahi ek dastaan hain
aur ye tasveeren nahi wo haseen lamhe hain
jinki ek jhalak saamne le aati hai un beete palon ko
jo afsaane ban chuke hain…
aaj phir taaza ho gaye! yekaek sab saamne aa gaya
aur main is jahan se door dusre jahan chala gaya.
Yaad aaya wo din jab khidkiyan khol k barsaat ki ek ek boond ka lutf lete the.
Chai ki pyaali khaali hone se pehle hi bharwa lete the.
har ek chuski mein kuch naya nikal k aata tha.
phir wo chaahe shayeri ho ya gazal. Mazak banakar logon ko satana.. phir bura maan ne par unko manana. Kitna aasan hua karta tha tab manana.
Abhi us jahan ka asar zehan ko chuua hi tha k achanak kisi ne haqeeqat se saamana kara diya.
wapas naye jahan mein lauta diya.
Jahan roz dikhavati duniya se haath milate hain.
Achanak se sab kuch door ho gaya… Jo pyaar tha wo naasor ho gaya
Yaha narazgi mein bhi banavat hai aur manana to jaise kisi ko aata hi nahi.
Dil todne mein sabhi ustaad hain, dil jodne mein koi nahi.
Ye baat ehsaas karane lagti hai k ab aap bade ho gaye ho.
Aur yehi hai wo duniyadaari jiski samajh bachpan se di jaane lagti hai.
phir aap kahin gachha khaate ho to koi sambhalne nahi aayega
Ho sakega to dhakka maar kar girayega. Aur galiti se koi uthane aaya to ehsaan k saath kuch alfaaz lagayega k pehle na samajhne ka nateeja dekha.
Koi nahi jaanega k ye dil naadan hai jo gustakhiyon se hi seekhta hai aur aaj bhi unhi lamhon mein jeeta hai.

Muskuraiye janaab aap lucknow mein hain.. :)

Abhi kuch din pehleki baat hai, isi vishay par charcha ho rahi thi ki aakhir bahar gaon k log is takiyakalm se anjaan kyun hain.. Bhai ye panktiyaan to mahaan shayar Mirza GALIB ki hain. kahir hataiye aaj achanak ek gaana sun liya jise kisi zamane mein lucknow k Radio City 91.1 fm se download kiya tha aur usme Rj Pooja apni surili aawaz mein bolti hai, ‘To kya hua aap hazrat ganj k traffic mein fanse hain, ghar se biwi ki daant jhel kar aaye hain, boss gaali diye chalye de raha hai, dost treat treat chilla rahe hain.. itni pareshaani k baad bhi janaab Muskuraiye kyunki aap lucknow mein hain‘. Khair hataiye ye sab kaha se le k baith gaye.

Bhai hudd to tab ho gayi jab ek miyaan bade hi pyar se bole anjali ji ‘baaki sab to sahi hai, par ye jo aap hum bolti hain zara clear kar diya kijiye sirf apne baare mein baat kar rahi ya muhalle ko describe kar rahi’. Ama yaar ye ho gayi na nayinsaafi waali baat. Are humare lucknow mein koi bhi zikra khud k baare mein hota hi nahi bhai hum bhaichaare waale log hain, sabko saath le k chalte hain. Ab is budbak(laalu ki zubaan mein) ko ye baat kaun samjhayega.

Are anurodh hai bhai k lucknow waalon ko unke ‘ama miyan’, ‘ hum’ aur ‘humare’ k liye koi pareshaan na kare.

Ab itna zikra ho hi gaya hai lucknow ka to aaj ye bhi likhne ka dil kar raha hai, us kahani ka jiske kch panne lucknow mein hi likhe gaye hain.. Ek ehsaas jo jaaga is shehar ki badaulat  aur aaj bhi wahan ki galiyon mein zinda hai..

Wo ek kahani thi kuch uljhi si..
Jhagdon aur lafdo se bhari thi
Kab canteen jaa k tau ko sataana.
5 maaza pe ek free karaana..
Wo humara tiwari jise kehte hum bimari
wo dixit ko banana ND humari
wo garima k thahake pagalpan bhari harkat
wo sumreen ka gulam ali mein gum ho jana
rupal ka baat baat pe naak fulana
ispe pandey ka naak mein ungli ghusana
katis k wo senti dialog.. my god bhagwaan bachaye..
wo gudu ko kahin pe bhi gawaana.
wo rishta ek kacchi dor sa..
samhaale samhaale yaha tak laana
wo ambedkar park ki vellapanti
shaam ko mama k momos khana
tiwari k hiphopper pe sami ko naachna
to kabhi rupal k chumbakk tu ka mazak udana.
wo nightouts maar k movie jaana,
movie ki raat station pe guzarna..
wo cumsome ki coffee aur antakshari se pakaana
yaad aata hai bahut wo ek tooti bike aur uske teen sawaar..
wo masti aur hullad aprampaar..
rishikesh ki rafting aur katis ka jeetod chillaana
Na jaane kab waapas aayega wo guzra zamana..
Sirf ek baar k liye hi sahi..
Hum sab ka phir se ek doosre mein gum ho jaana..